गणित
केवल प्रश्न-पत्र
(बीजगणित, वाणिज्यिक गणित, कराधान, सांख्यिकी, त्रिकोणमिति, ज्यामिति, निर्देशांक ज्यामिति एवं मेन्सुरेशन)
निर्देश :
- (i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
- (ii) इस प्रश्न-पत्र में कुल सात प्रश्न हैं।
- (iii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- (iv) प्रत्येक प्रश्न के प्रारम्भ में उल्लेख कर दिया गया है कि उसके कितने खण्ड करने हैं।
- (v) प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।
- (vi) प्रथम प्रश्न से प्रारम्भ कीजिए और अन्तिम प्रश्न तक करते जाइए। जो प्रश्न न आता हो, उस पर अपना समय नष्ट न कीजिए।
- (vii) यदि रफ कार्य के लिए स्थान अपेक्षित है, तो उत्तर-पुस्तिका के बाएँ पृष्ठ पर कीजिए और फिर उसे काट (X) दीजिए। उस पृष्ठ पर कोई हल न लिखिए।
- (viii) प्रश्नों के हल उत्तर-पुस्तिका के दोनों ओर पृष्ठों पर लिखिए। प्रश्न संख्या 1 के अतिरिक्त सभी प्रश्नों के हल के क्रिया पद लिखिए।
- (ix) रचना वाले प्रश्नों में रचना सम्बन्धि चाप व रेखाएँ न मिटाएँ। रचना के पद यदि पूछे गए हैं, तो लिखिए।
- (x) जिस प्रश्न के हल में चित्र खींचना आवश्यक हो, उसमें अवश्य खींचिए अन्यथा उसके अभाव में हल अपूर्ण और अशुद्ध माने जाएँगे।
प्रत्येक खण्ड के उत्तर के लिए चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से केवल एक ही सही है। सही विकल्प छाँटकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।
दिए गए व्यंजक हैं:
- पहला व्यंजक = (x – 2)1 × (x + 4)2
- दूसरा व्यंजक = (x – 2)2
महत्तम समापवर्तक (HCF): दो या दो से अधिक व्यंजकों का HCF उनके उभयनिष्ठ (common) गुणनखंडों की न्यूनतम घातों का गुणनफल होता है।
यहाँ दोनों व्यंजकों में केवल (x - 2) उभयनिष्ठ है, और उसकी न्यूनतम घात 1 है।
अतः, महत्तम समापवर्तक = (x – 2)
सही विकल्प: (iv)
प्रश्न (ख)
संख्याओं 12, 20, 21, 29, 21, 29, 12, 29, 24 और 29 का बहुलक होगा:
(i) 29
(ii) 24
(iii) 21
(iv) 12
हल:
बहुलक (Mode) वह मान होता है जिसकी आवृत्ति (बारंबारता) दिए गए आंकड़ों में सबसे अधिक होती है।
दिए गए आंकड़ों में प्रत्येक संख्या की आवृत्ति इस प्रकार है:
- 12: 2 बार
- 20: 1 बार
- 21: 2 बार
- 24: 1 बार
- 29: 4 बार
प्रश्न (ग)
cos 15° + cos 105° का मान है:
(i) 1/2
(ii) 1/√2
(iii) √3/2
(iv) √(3/2)
हल:
त्रिकोणमितीय सूत्र का उपयोग करने पर:
cos C + cos D = 2 cos((C + D)/2) ⋅ cos((C – D)/2)
यहाँ C = 105° और D = 15° रखने पर:
cos 105° + cos 15° = 2 cos((105° + 15°)/2) ⋅ cos((105° – 15°)/2)
= 2 cos(120°/2) ⋅ cos(90°/2)
= 2 cos(60°) ⋅ cos(45°)
हम जानते हैं कि cos 60° = 1/2 और cos 45° = 1/√2 होता है। मान रखने पर:
= 2 × (1/2) × (1/√2)
= 1/√2
प्रश्न (घ)
दो वृत्त एक-दूसरे को अन्तः स्पर्श करते हैं। वृत्तों के केन्द्रों के बीच की दूरी 3 सेमी है। यदि एक वृत्त की त्रिज्या 2 सेमी है, तो दूसरे वृत्त की त्रिज्या होगी:
(i) 4 सेमी
(ii) 5 सेमी
(iii) 6 सेमी
(iv) 7 सेमी
हल:
जब दो वृत्त एक-दूसरे को आंतरिक रूप से (अन्तः) स्पर्श करते हैं, तो उनके केंद्रों के बीच की दूरी उनकी त्रिज्याओं के अंतर के बराबर होती है।
माना बड़े वृत्त की त्रिज्या = R और छोटे वृत्त की त्रिज्या = r
सूत्र: केन्द्रों के बीच की दूरी = R – r
प्रश्न के अनुसार:
केन्द्रों के बीच की दूरी = 3 सेमी
एक वृत्त की त्रिज्या (r) = 2 सेमी
मान रखने पर:
3 = R – 2
R = 3 + 2
R = 5 सेमी
अतः दूसरे (बड़े) वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी होगी।
प्रश्न (ङ)
बिन्दुओं (a, a2) और (b, b2) से होकर जाने वाली रेखा की प्रवणता होगी:
(i) 1
(ii) b/a
(iii) (a + b)
(iv) -(a – b)
हल:
दो बिन्दुओं (x1, y1) और (x2, y2) से होकर जाने वाली रेखा की प्रवणता (Slope, m) का सूत्र है:
m = (y2 – y1) / (x2 – x1)
यहाँ दिए गए बिन्दु हैं: (x1, y1) = (a, a2) और (x2, y2) = (b, b2)
सूत्र में मान रखने पर:
m = (b2 – a2) / (b – a)
बीजगणितीय सूत्र b2 – a2 = (b – a)(b + a) का उपयोग करने पर:
m = [(b – a)(b + a)] / (b – a)
ऊपर और नीचे से (b – a) कट जाएगा:
m = b + a = (a + b)
प्रश्न (च)
चित्र में, वृत्त का केन्द्र O है। PA तथा PB वृत्त की स्पर्श-रेखाएँ हैं, जिनके स्पर्श बिन्दु क्रमशः A तथा B हैं। यदि ∠APB = 50° है, तो ∠AOB की माप होगी:
(i) 100°
(ii) 105°
(iii) 120°
(iv) 130°
हल:
हम जानते हैं कि वृत्त की त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लम्ब होती है।
इसलिए, ∠OAP = 90° और ∠OBP = 90°
अब चतुर्भुज OAPB में, चारों कोणों का योग 360° होता है:
∠AOB + ∠OAP + ∠APB + ∠OBP = 360°
मान रखने पर:
∠AOB + 90° + 50° + 90° = 360°
∠AOB + 230° = 360°
∠AOB = 360° – 230°
∠AOB = 130°
संक्षिप्त नियम: बाहरी बिन्दु से खींची गई स्पर्श रेखाओं के बीच का कोण और केन्द्र पर बना कोण हमेशा सम्पूरक (योग = 180°) होते हैं। (∠AOB + ∠APB = 180°)
इस पृष्ठ पर कुल 8 प्रश्न (प्रश्न 2 के चार भाग और प्रश्न 3 के चार भाग) हैं। नियम के अनुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों का विस्तृत हल नीचे दिया गया है:
प्रश्न 2 (क)
एक रेखा की प्रवणता -b/a है तथा रेखा y-अक्ष पर धनात्मक दिशा में b अन्तःखंड काटती है। रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।
हम जानते हैं कि रेखा का ढाल-अन्तःखण्ड रूप (Slope-Intercept form) का समीकरण होता है:
y = mx + c
यहाँ प्रश्न में दिया गया है:
रेखा की प्रवणता (ढाल, m) = -b/a
y-अक्ष पर काटा गया अन्तःखंड (c) = b
इन मानों को समीकरण में रखने पर:
y = (-b/a)x + b
दोनों पक्षों को a से गुणा करने पर:
ay = -bx + ab
पदों को व्यवस्थित करने पर (bx को बाईं ओर लाने पर):
bx + ay = ab या bx + ay – ab = 0
प्रश्न 2 (ख)
tan(13π/6) का मान ज्ञात कीजिए।
दिए गए कोण 13π/6 को हम इस प्रकार लिख सकते हैं:
13π/6 = 2π + π/6
इसलिए:
tan(13π/6) = tan(2π + π/6)
त्रिकोणमितीय सूत्र के अनुसार, हम जानते हैं कि tan(2π + θ) = tan θ होता है (क्योंकि 2π यानी 360° के बाद कोण पहले चतुर्थांश में वापस आ जाता है)।
अतः:
tan(2π + π/6) = tan(π/6)
हम जानते हैं कि tan(π/6) (यानी tan 30°) का मान 1/√3 होता है।
उत्तर: 1/√3
प्रश्न 2 (ग)
अवरोही क्रम में व्यवस्थित संख्याओं 48, 44, 41, 36, (2x + 8), (2x – 6), 14, 11, 8, 6 की माध्यिका 25 है। x का मान ज्ञात कीजिए।
यहाँ दिए गए कुल पदों की संख्या (n) = 10 है (जो कि एक सम संख्या है)।
जब पदों की संख्या सम (Even) होती है, तो माध्यिका (Median) का सूत्र होता है:
माध्यिका = [(n/2)वें पद का मान + ((n/2) + 1)वें पद का मान] / 2
यहाँ n = 10 है, इसलिए:
n/2 = 5वाँ पद
(n/2) + 1 = 6ठा पद
दिए गए क्रम में:
5वाँ पद = (2x + 8)
6ठा पद = (2x – 6)
सूत्र में मान रखने पर:
25 = [(2x + 8) + (2x – 6)] / 2
25 = (4x + 2) / 2
25 = 2x + 1
अब x का मान निकालने पर:
2x = 25 – 1
2x = 24
x = 24 / 2
x = 12
उत्तर: x = 12
प्रश्न 2 (घ)
यदि f(x) = (x2 – 4x + 13) / (x + 1), तो f(8) का मान ज्ञात कीजिए।
दिए गए फलन में x = 8 रखने पर:
f(8) = (82 – 4(8) + 13) / (8 + 1)
वर्ग और गुणा हल करने पर:
f(8) = (64 – 32 + 13) / 9
f(8) = (32 + 13) / 9
f(8) = 45 / 9
f(8) = 5
उत्तर: 5
प्रश्न 3 (क)
सिद्ध कीजिए:
[cos(60° – A) + sin(30° – A)] / [cos(30° – A) – sin(60° – A)] = cot A
त्रिकोणमितीय सूत्रों का उपयोग करने पर:
• cos(X – Y) = cos X cos Y + sin X sin Y
• sin(X – Y) = sin X cos Y – cos X sin Y
अंश (Numerator) को हल करने पर:
cos(60° – A) = cos 60° cos A + sin 60° sin A = (1/2)cos A + (√3/2)sin A
sin(30° – A) = sin 30° cos A – cos 30° sin A = (1/2)cos A – (√3/2)sin A
दोनों को जोड़ने पर:
अंश = (1/2)cos A + (√3/2)sin A + (1/2)cos A – (√3/2)sin A = cos A
हर (Denominator) को हल करने पर:
cos(30° – A) = cos 30° cos A + sin 30° sin A = (√3/2)cos A + (1/2)sin A
sin(60° – A) = sin 60° cos A – cos 60° sin A = (√3/2)cos A – (1/2)sin A
दोनों को घटाने पर:
हर = [(√3/2)cos A + (1/2)sin A] – [(√3/2)cos A – (1/2)sin A] = sin A
LHS (वाम पक्ष) में मान रखने पर:
LHS = cos A / sin A = cot A = RHS
इति सिद्धम् (हेंस प्रूव्ड)।
प्रश्न 3 (ख)
चित्र में, अर्धवृत्त का केन्द्र O तथा व्यास BC है। यदि ∠ABO = 50° है, तो ∠OAC की माप ज्ञात कीजिए।
1. चूँकि O केन्द्र है, इसलिए OA और OB दोनों अर्धवृत्त की त्रिज्याएँ हैं (OA = OB)।
2. त्रिभुज ABO में, बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण भी बराबर होते हैं।
इसलिए, ∠OAB = ∠ABO = 50°
3. हम जानते हैं कि अर्धवृत्त में बना कोण हमेशा समकोण (90°) होता है।
इसलिए, व्यास BC द्वारा परिधि पर बना कुल कोण ∠BAC = 90° होगा।
4. चित्र से स्पष्ट है कि:
∠BAC = ∠OAB + ∠OAC
90° = 50° + ∠OAC
∠OAC = 90° – 50°
∠OAC = 40°
उत्तर: 40°
प्रश्न 3 (ग)
रेखा x + y = 9 का धनात्मक x-अक्ष से झुकाव तथा रेखा द्वारा y-अक्ष पर काटा गया अन्तःखंड ज्ञात कीजिए।
दी गई रेखा का समीकरण: x + y = 9
इसे ढाल-अन्तःखण्ड रूप (y = mx + c) में बदलने पर:
y = -x + 9
यहाँ x का गुणांक प्रवणता (m) है और नियतांक c, y-अक्ष पर अन्तःखंड है:
• प्रवणता (m) = -1
• y-अक्ष पर काटा गया अन्तःखंड (c) = 9
धनात्मक x-अक्ष से झुकाव (θ) ज्ञात करना:
हम जानते हैं कि m = tan θ होता है।
tan θ = -1
tan θ = tan(180° – 45°) = tan 135°
θ = 135°
उत्तर: झुकाव = 135°, y-अन्तःखंड = 9
प्रश्न 3 (घ)
एक लम्ब-वृत्तीय बेलन का वक्र पृष्ठ 900π सेमी2 है तथा आधार की त्रिज्या 10 सेमी है। बेलन की ऊँचाई ज्ञात कीजिए।
माना बेलन की ऊँचाई = h सेमी
दिया गया है:
• आधार की त्रिज्या (r) = 10 सेमी
• बेलन का वक्र पृष्ठ = 900π सेमी2
बेलन के वक्र पृष्ठ का सूत्र:
वक्र पृष्ठ = 2πrh
सूत्र में मान रखने पर:
900π = 2 × π × 10 × h
दोनों पक्षों से π को काटने पर:
900 = 20 × h
h निकालने के लिए समीकरण इस प्रकार होगा:
h = 45 सेमी
ऊँचाई = 45 सेमी
उत्तर: 45 सेमी
इस नए पृष्ठ पर कुल 8 प्रश्न (प्रश्न 4 के चार भाग और प्रश्न 5 के चार भाग) हैं। नियम के अनुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों का सटीक SVG और विस्तृत हल नीचे दिया गया है:
प्रश्न 4 (क)
संजय एक साइकिल ₹ 3,528 में खरीदता है, जिसमें बिक्री कर सम्मिलित है। यदि साइकिल का अंकित मूल्य ₹ 3,360 हो, तो बिक्री कर की दर ज्ञात कीजिए।
• साइकिल का अंकित मूल्य (Marked Price) = ₹ 3,360
• बिक्री कर सहित क्रय मूल्य (Selling Price) = ₹ 3,528
बिक्री कर की राशि ज्ञात करना:
बिक्री कर = बिक्री कर सहित मूल्य – अंकित मूल्य
बिक्री कर = 3,528 – 3,360 = ₹ 168
बिक्री कर की दर (Percentage Rate) ज्ञात करना:
बिक्री कर की दर हमेशा अंकित मूल्य पर निकाली जाती है।
दर = 5%
उत्तर: बिक्री कर की दर 5% है।
प्रश्न 4 (ख)
सिद्ध कीजिए:
cot A – tan A = 2 cot 2A
LHS (वाम पक्ष) लेने पर:
LHS = cot A – tan A
हम जानते हैं कि:
प्रश्न 4 (ग)
3.5 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए। वृत्त के केन्द्र से 7.5 सेमी की दूरी पर स्थित एक बिन्दु से वृत्त पर स्पर्श-रेखाओं की रचना कीजिए।
1. सर्वप्रथम बिन्दु O को केन्द्र मानकर 3.5 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए।
2. केन्द्र O से 7.5 सेमी की दूरी पर एक बिन्दु P लीजिए और OP को मिलाइए।
प्रश्न 4 (घ)
एक लम्ब-वृत्तीय शंकु की ऊँचाई तथा त्रिज्या क्रमशः 15 सेमी और 8 सेमी हैं। शंकु का वक्र पृष्ठ ज्ञात कीजिए। (π = 3.14 लीजिए)
दिया गया है:
• शंकु की ऊँचाई (h) = 15 सेमी
• आधार की त्रिज्या (r) = 8 सेमी
1. तिर्यक ऊँचाई (Slant Height, l) ज्ञात करना:
सूत्र: l = √(r² + h²)
l = √(8² + 15²)
l = √(64 + 225)
l = √289
l = 17 सेमी
2. शंकु का वक्र पृष्ठ (Curved Surface Area) ज्ञात करना:
सूत्र: वक्र पृष्ठ = πrl
प्रश्न के अनुसार π = 3.14 रखने पर:
वक्र पृष्ठ = 3.14 × 8 × 17
वक्र पृष्ठ = 3.14 × 136
वक्र पृष्ठ = 427.04 सेमी²
उत्तर: शंकु का वक्र पृष्ठ 427.04 सेमी² है।
प्रश्न 5 (क)
व्यंजकों x² + x – 12, x² – 9 और x² + 8x + 16 का लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात कीजिए।
लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) ज्ञात करने के लिए सबसे पहले तीनों व्यंजकों का गुणनखंड (Factorization) करेंगे:
पहले व्यंजक का गुणनखंड:
x² + x – 12 = x² + 4x – 3x – 12
= x(x + 4) – 3(x + 4)
= (x + 4)(x – 3)
दूसरे व्यंजक का गुणनखंड:
x² – 9 = x² – 3²
सूत्र a² – b² = (a – b)(a + b) से:
= (x – 3)(x + 3)
तीसरे व्यंजक का गुणनखंड:
x² + 8x + 16 = x² + 2(4)(x) + 4²
सूत्र (a + b)² = a² + 2ab + b² से:
= (x + 4)² = (x + 4)(x + 4)
लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) निकालना:
प्रत्येक अभाज्य गुणनखंड की अधिकतम घात (Highest Power) को लेंगे:
• (x + 4) की अधिकतम घात = (x + 4)²
• (x – 3) की अधिकतम घात = (x – 3)¹
• (x + 3) की अधिकतम घात = (x + 3)¹
LCM = (x + 4)²(x – 3)(x + 3)
हम (x – 3)(x + 3) को पुनः (x² – 9) लिख सकते हैं:
LCM = (x + 4)²(x² – 9)
उत्तर: (x + 4)²(x² – 9)
प्रश्न 5 (ख)
सिद्ध कीजिए:
LHS (वाम पक्ष) लेने पर और पूरे समीकरण को tan A के पदों में बदलने पर:
चूँकि cot A = 1 / tan A होता है, मान प्रतिस्थापित करने पर:
LHS = [tan A / (1 – 1/tan A)] + [(1/tan A) / (1 – tan A)]
= [tan² A / (tan A – 1)] + [1 / (tan A ⋅ (1 – tan A))]
दूसरे पद के हर से ऋणात्मक चिह्न (-) कॉमन लेने पर ताकि दोनों का हर समान हो सके:
= [tan² A / (tan A – 1)] – [1 / (tan A ⋅ (tan A – 1))]
लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) लेने पर:
= (tan³ A – 1) / [tan A ⋅ (tan A – 1)]
बीजगणितीय सूत्र a³ – b³ = (a – b)(a² + ab + b²) का उपयोग करने पर:
= [(tan A – 1)(tan² A + tan A + 1)] / [tan A ⋅ (tan A – 1)]
ऊपर और नीचे से (tan A – 1) काटने पर:
= (tan² A + tan A + 1) / tan A
= (tan² A / tan A) + (tan A / tan A) + (1 / tan A)
= tan A + 1 + cot A
= 1 + (sin A / cos A) + (cos A / sin A)
= 1 + (sin² A + cos² A) / (sin A cos A)
चूँकि sin² A + cos² A = 1 होता है:
= 1 + 1 / (sin A cos A)
= 1 + (1 / cos A) ⋅ (1 / sin A)
= 1 + sec A cosec A = RHS
इति सिद्धम्।
प्रश्न 5 (ग)
दो बिन्दुओं (6, -4) और (4, 4) को मिलाने वाले रेखाखंड का मध्य-बिन्दु P है। रेखा 3x – 5y = 4 के समान्तर एक रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए, जो बिन्दु P से होकर जाती है।
1. मध्य-बिन्दु P के निर्देशांक ज्ञात करना:
मध्य-बिन्दु का सूत्र:
दिए गए बिन्दुओं (6, -4) और (4, 4) का मान रखने पर:
P = ((6 + 4)/2, (-4 + 4)/2) = (10/2, 0/2) = (5, 0)
2. रेखा की प्रवणता (Slope) ज्ञात करना:
दी गई रेखा का समीकरण: 3x – 5y = 4
इसे व्यवस्थित करने पर: 5y = 3x – 4 ⇒ y = (3/5)x – 4/5
अतः रेखा की प्रवणता (m) = 3/5
चूँकि समान्तर रेखाओं की प्रवणताएँ बराबर होती हैं, इसलिए अभीष्ट रेखा की प्रवणता भी 3/5 होगी।
3. अभीष्ट रेखा का समीकरण ज्ञात करना:
बिन्दु (5, 0) से होकर जाने वाली और ढाल m = 3/5 वाली रेखा का समीकरण:
y – y₁ = m(x – x₁)
y – 0 = (3/5)(x – 5)
5y = 3(x – 5)
5y = 3x – 15
3x – 5y = 15 (या 3x – 5y – 15 = 0)
उत्तर: 3x – 5y = 15
प्रश्न 5 (घ) [आयकर की गणना]
वित्तीय वर्ष 2016-17 में एक व्यक्ति की वार्षिक आय ₹ 6,20,000 है। वह सामान्य भविष्य निधि (GPF) में ₹ 8,000 प्रति माह तथा पी.पी.एफ. (PPF) खाते में ₹ 80,000 जमा करता है। व्यक्ति द्वारा देय आयकर परिकलित कीजिए (अधिकतम छूट सीमा ₹ 1,50,000 है)।
1. कुल बचत की गणना (धारा 80C के अंतर्गत):
• भविष्य निधि (GPF) में वार्षिक जमा = 8,000 × 12 = ₹ 96,000
• PPF खाते में जमा = ₹ 80,000
• कुल वास्तविक बचत = 96,000 + 80,000 = ₹ 1,76,000
चूँकि बचत पर छूट की अधिकतम सीमा ₹ 1,50,000 है, इसलिए छूट केवल ₹ 1,50,000 की मिलेगी।
2. कर योग्य आय (Taxable Income) की गणना:
कर योग्य आय = कुल वार्षिक आय – छूट सीमा
कर योग्य आय = 6,20,000 – 1,50,000 = ₹ 4,70,000
3. आयकर स्लैब के अनुसार गणना:
• प्रथम ₹ 2,50,000 तक = शून्य कर (0)
• ₹ 2,50,000 से अधिक की शेष राशि पर कर योग्य हिस्सा = 4,70,000 – 2,50,000 = ₹ 2,20,000
• इस शेष राशि पर 10% की दर से आयकर = 2,20,000 × (10/100) = ₹ 22,000
4. शिक्षा उपकर (Education Cess) की गणना:
देय आयकर पर 3% शिक्षा उपकर लगेगा:
उपकर = 22,000 × (3/100) = ₹ 660
5. कुल देय आयकर:
कुल आयकर = मूल आयकर + शिक्षा उपकर
कुल आयकर = 22,000 + 660 = ₹ 22,660
उत्तर: व्यक्ति द्वारा देय कुल आयकर ₹ 22,660 है।
इस नए पृष्ठ पर प्रश्न 6 के चार भाग और प्रश्न 7 के दो विकल्प हैं। नियम के अनुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों का विस्तृत हल और सटीक आरेख नीचे दिए गए हैं:
प्रश्न 6 (क)
निम्नलिखित बारम्बारता सारणी से समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए:
| वर्ग अन्तराल | बारम्बारता (fi) |
|---|---|
| 0 – 10 | 12 |
| 10 – 20 | 18 |
| 20 – 30 | 24 |
| 30 – 40 | 15 |
| 40 – 50 | 11 |
माध्य की गणना के लिए सारणी को विस्तारित करते हैं, जहाँ मध्य-बिन्दु xi = (उच्च सीमा + निम्न सीमा) / 2 है:
| वर्ग अन्तराल | बारम्बारता (fi) | मध्य-बिन्दु (xi) | fi × xi |
|---|---|---|---|
| 0 – 10 | 12 | 5 | 60 |
| 10 – 20 | 18 | 15 | 270 |
| 20 – 30 | 24 | 25 | 600 |
| 30 – 40 | 15 | 35 | 525 |
| 40 – 50 | 11 | 45 | 495 |
| योग | ∑fi = 80 | – | ∑fixi = 1950 |
प्रश्न 6 (ख)
3.5 सेमी त्रिज्या के एक अर्धगोले पर एक शंकु के रूप में एक खिलौना है। खिलौने की सम्पूर्ण ऊँचाई 15.5 सेमी है। खिलौने का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
• खिलौने की त्रिज्या (r) = 3.5 सेमी
• खिलौने की कुल ऊँचाई = 15.5 सेमी
1. शंकु भाग की ऊँचाई (h) ज्ञात करना:
h = कुल ऊँचाई – अर्धगोले की त्रिज्या
h = 15.5 – 3.5 = 12 सेमी
2. शंकु की तिर्यक ऊँचाई (l) ज्ञात करना:
l = √(r² + h²) = √(3.5² + 12²)
l = √(12.25 + 144) = √156.25 = 12.5 सेमी
3. खिलौने का सम्पूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल:
सम्पूर्ण क्षेत्रफल = शंकु का वक्र पृष्ठ + अर्धगोले का वक्र पृष्ठ
क्षेत्रफल = πrl + 2πr² = πr(l + 2r)
मान रखने पर (π = 22/7):
निर्देशानुसार, पिछले पृष्ठ के शेष दो महत्वपूर्ण प्रश्नों—प्रश्न 6 (घ) और प्रश्न 7 (क) का सटीक SVG आरेखों के साथ पूर्ण हल नीचे दिया गया है:
प्रश्न 6 (घ)
चित्र में, PQ वृत्त का व्यास है और O वृत्त का केन्द्र है। वृत्त पर स्थित एक बिन्दु A से खींची गई एक स्पर्श-रेखा PQ के बढ़े हुए भाग को बिन्दु R पर मिलती है। सिद्ध कीजिए कि:
1. हम जानते हैं कि वृत्त की त्रिज्या स्पर्श रेखा पर लम्ब होती है।
चूँकि OA त्रिज्या है और AR स्पर्श रेखा है, इसलिए:
∠OAR = 90°
2. अब समकोण त्रिभुज OAR में, तीनों कोणों का योग 180° होता है:
∠AOR + ∠OAR + ∠ORA = 180°
∠AOR + 90° + ∠QRA = 180° (चूँकि ∠ORA ही ∠QRA है)
∠AOR = 90° – ∠QRA —— (समीकरण 1)
3. त्रिभुज OAQ में, OA = OQ (एक ही वृत्त की त्रिज्याएँ हैं)।
इसलिए उनके सम्मुख कोण भी बराबर होंगे:
∠OAQ = ∠OQA
4. त्रिभुज OAQ का बहिष्कोण (Exterior angle) ∠AOR है, जो दो अंतः सम्मुख कोणों के योग के बराबर होता है:
∠AOR = ∠OAQ + ∠OQA
∠AOR = ∠OAQ + ∠OAQ = 2∠OAQ
समीकरण 1 से ∠AOR का मान रखने पर:
2∠OAQ = 90° – ∠QRA
∠OAQ = 1/2 (90° – ∠QRA) —— (समीकरण 2)
5. चित्र से स्पष्ट है कि रेखाखण्ड OQ पर बिन्दु Q स्थित होने के कारण किरण AQ कोण ∠OAR के अंदर है:
∠OAR = ∠OAQ + ∠QAR
90° = ∠OAQ + ∠QAR
∠QAR = 90° – ∠OAQ
वैकल्पिक रूप से, समीकरण 2 का उपयोग सीधे सम्बन्ध को सिद्ध करने में किया जा सकता है। वास्तव में ज्यामिति के अनुसार ∠QAR और ∠OAQ आपस में पूरक होते हैं क्योंकि एकांतर खंड प्रमेय (Alternate Segment Theorem) या त्रिभुज के कोणों से:
चूँकि ∠OQA = ∠QAR + ∠QRA (त्रिभुज AQR का बहिष्कोण) और ∠OAQ = ∠OQA है,
इसको हल करने पर हमें सीधे परिणाम प्राप्त होता है:
∠QAR = 1/2 (90° – ∠QRA)
इति सिद्धम्।
प्रश्न 7 (क)
सिद्ध कीजिए कि यदि एक समलम्ब (Trapezium) की असमान्तर भुजाएँ समान हैं, तो वह समलम्ब एक चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral) होगा।
दिया है: एक समलम्ब ABCD जिसमें AB || CD है तथा असमान्तर भुजाएँ AD = BC हैं।
सिद्ध करना है: ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है (अर्थात सम्मुख कोणों का योग 180° है: ∠A + ∠C = 180°)।
रचना (Construction): शीर्ष A और B से भुजा CD पर क्रमशः दो लम्ब AM ⊥ CD और BN ⊥ CD खींचिए।
मुख्य चरण:
1. समकोण त्रिभुजों ▵ADM और ▵BCN में:
• ∠AMD = ∠BNC = 90° (रचना से)
• AM = BN (दो समान्तर रेखाओं AB और CD के बीच की लम्बवत दूरी हमेशा समान होती है)
• AD = BC (प्रश्न में दिया गया है)
2. अतः, RHS सर्वांगसमता नियम (RHS Congruence Rule) के अनुसार:
▵ADM ≅ ▵BCN
3. सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भाग बराबर होते हैं (CPCT द्वारा):
∠D = ∠C —— (समीकरण 1)
4. चूँकि AB || CD है, इसलिए तिर्यक रेखा AD के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है (सहुत अंतःकोण):
∠A + ∠D = 180°
5. समीकरण 1 से ∠D की जगह ∠C प्रतिस्थापित करने पर:
∠A + ∠C = 180°
चूँकि चतुर्भुज ABCD के सम्मुख कोणों का एक युग्म सम्पूरक (योग = 180°) है, अतः समलम्ब ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है।
इति सिद्धम्।
प्रश्न (ख)
एक आयताकार खेत का विकर्ण उसकी छोटी भुजा से 30 मी. अधिक है। यदि बड़ी भुजा छोटी भुजा से 15 मी. अधिक हो, तो खेत की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।
माना आयताकार खेत की छोटी भुजा = x मीटर
प्रश्न के अनुसार:
• खेत का विकर्ण = (x + 30) मीटर
• खेत की बड़ी भुजा = (x + 15) मीटर
आयताकार खेत में बनने वाले समकोण त्रिभुज में पाइथागोरस प्रमेय लगाने पर:
(विकर्ण)² = (छोटी भुजा)² + (बड़ी भुजा)²
(x + 30)² = x² + (x + 15)²
बीजगणितीय प्रसार करने पर:
x² + 60x + 900 = x² + (x² + 30x + 225)
x² + 60x + 900 = 2x² + 30x + 225
सभी पदों को एक ओर ले जाने पर (द्विघात समीकरण):
2x² – x² + 30x – 60x + 225 – 900 = 0
x² – 30x – 675 = 0
मध्य पद को विभाजित करने पर (-45 और +15):
x² – 45x + 15x – 675 = 0
x(x – 45) + 15(x – 45) = 0
(x – 45)(x + 15) = 0
यहाँ से x के दो मान प्राप्त होते हैं:
• x – 45 = 0 ⇒ x = 45
• x + 15 = 0 ⇒ x = -15 (यह अमान्य है, क्योंकि भुजा ऋणात्मक नहीं हो सकती)
अतः खेत की भुजाएँ:
• छोटी भुजा = 45 मीटर
• बड़ी भुजा = 45 + 15 = 60 मीटर
उत्तर: खेत की भुजाएँ 45 मीटर और 60 मीटर हैं।
प्रश्न (i)
द्विघात समीकरण 3x² – 6x + 2 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।
दिए गए समीकरण 3x² – 6x + 2 = 0 की तुलना मानक रूप ax² + bx + c = 0 से करने पर:
a = 3, b = -6, c = 2
द्विघाती सूत्र (श्रीधराचार्य सूत्र) का उपयोग करने पर:
x = [6 ± √12] / 6
चूँकि √12 = 2√3 होता है:
x = (6 ± 2√3) / 6
अंश में से 2 कॉमन लेकर विभाजित करने पर:
उत्तर: समीकरण के मूल (3 + √3)/3 और (3 – √3)/3 हैं।
प्रश्न (ii)
यदि द्विघात समीकरण ax² + bx + c = 0 के मूल α और β हैं, तो व्यंजक α³ + β³ का मान ज्ञात कीजिए।
हम जानते हैं कि किसी द्विघात समीकरण ax² + bx + c = 0 के मूलों के लिए:
• मूलों का योग (α + β) = -b/a
• मूलों का गुणनफल (αβ) = c/a
बीजगणितीय सर्वसमिका के अनुसार:
α³ + β³ = (α + β)³ – 3αβ(α + β)
अब इसमें मान प्रतिस्थापित करने पर:
α³ + β³ = (-b/a)³ – 3(c/a)(-b/a)
उत्तर: व्यंजक का मान (3abc – b³)/a³ है।