up board paper 2019 class 10 math solved paper

UP Board Class 10 Mathematics 2018
U.P. BOARD CLASS 10 MATHEMATICS- 2018
उत्तर प्रदेश बोर्ड कक्षा 10 गणित- 2018
822 (HZ)
गणित
(बीजगणित, वाणिज्यिक गणित, कराधान, सांख्यिकी, त्रिकोणमिति, ज्यामिति, निर्देशांक ज्यामिति एवं मेन्सुरेशन)
समय: तीन घण्टे 15 मिनट (पूर्णांक: 70)
निर्देश: प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
  • निर्देश: 1. इस प्रश्न-पत्र में कुल सात प्रश्न हैं।
  • 2. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  • 3. प्रत्येक प्रश्न के प्रारम्भ में उल्लेख कर दिया गया है कि उसके कितने खण्ड करने हैं।
  • 4. प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।
  • 5. प्रथम प्रश्न से प्रारम्भ कीजिए और अंतिम प्रश्न तक करते जाइए। जो प्रश्न न आता हो उस पर समय नष्ट न कीजिए।
  • 6. यदि रफ कार्य के लिये स्थान अपेक्षित है, तो उत्तर पुस्तिका के बाएँ पृष्ठ पर कीजिए और फिर उसे काट (✕) दीजिए। उस पर कोई हल न लिखिए।
  • 7. प्रश्नों के हल उत्तर पुस्तिका के दोनों ओर पृष्ठों पर लिखिए। प्रश्न संख्या 1 के अतिरिक्त सभी प्रश्नों के हल के क्रियापद लिखिए।
  • 8. रचना वाले प्रश्नों में रचना सम्बन्धित चाप व रेखाएँ न मिटाएँ। रचना पद यदि पूछा गया है तो लिखिए।
  • 9. जिस प्रश्न के हल में चित्र खींचना आवश्यक हो, उसमें स्वच्छ एवं स्पष्ट चित्र अवश्य खींचिए अन्यथा उसके अभाव में हल अपूर्ण और अशुद्ध माना जायेगा।
1. सभी खण्ड कीजिए:
प्रत्येक खण्ड में प्रश्न के उत्तर के लिए चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से केवल एक ही सही है। सही विकल्प चुनकर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए।

यह नया प्रश्नपत्र उत्तर प्रदेश बोर्ड कक्षा 10 गणित (2018) – सेट 822 (HZ) का है। नियमानुसार, इसके पहले 3 स्वतंत्र बहुविकल्पीय प्रश्नों (1 क, ख, ग) का पूर्ण हल नीचे दिया गया है:

प्रश्न 1 (क)

व्यंजक

1 + x/y – 1 1 – x/y का मान होगा:

विकल्प:
(i) -1      (ii) 0      (iii) 1      (iv) 2
उत्तर: (ii) 0

हल:
दिए गए भिन्न के अंश (Numerator) और हर (Denominator) को ध्यान से देखें:
• अंश = (x/y) – 1
• हर = 1 – (x/y)

यदि हम अंश में से ऋणात्मक चिह्न (-) कॉमन (उभयनिष्ठ) ले लें, तो यह इस प्रकार बदल जाएगा:
(x/y) – 1 = – (1 – x/y)

अब इस मान को मूल व्यंजक में रखने पर:
= 1 + – (1 – x/y) 1 – x/y
ऊपर और नीचे से (1 – x/y) आपस में पूरी तरह कट जाएगा:
= 1 + (-1)
= 1 – 1 = 0

प्रश्न 1 (ख)

tan (570°) का मान होगा:

विकल्प:
(i) -√3      (ii) -1/√3      (iii) 1/√3      (iv) √3
उत्तर: (iii) 1/√3

हल:
कोण 570° को हम 360° के गुणज के रूप में तोड़कर लिख सकते हैं:
570° = 360° + 210°

चूँकि हम जानते हैं कि tan (360° + θ) = tan θ होता है (एक पूर्ण चक्कर के बाद त्रिकोणमितीय अनुपात पहले चतुर्थांश की तरह समान रहता है):
tan (570°) = tan (210°)

अब 210° को पुनः तीसरे चतुर्थांश के रूप में व्यक्त करने पर:
210° = 180° + 30°

चूँकि तीसरे चतुर्थांश में tan धनात्मक होता है और सूत्रानुसार tan (180° + θ) = tan θ होता है:
tan (210°) = tan (30°)

हम जानते हैं कि tan 30° का मान 1/√3 होता है।

प्रश्न 1 (ग)

चित्र में, यदि ∠SQR = 65° और ∠RPQ = 40° हो, तो ∠QRS का माप होगा:

हल:
वृत्त के सिद्धांतों के अनुसार, एक ही वृत्तखंड में बने कोण (Angles in the same segment) समान होते हैं।
यहाँ जीवा QR द्वारा परिधि पर दो कोण ∠RPQ और ∠RSQ बन रहे हैं।
इसलिए, ∠RSQ = ∠RPQ = 40°

अब त्रिभुज ▵QRS में, त्रिभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है:
∠SQR + ∠RSQ + ∠QRS = 180°

मान रखने पर:
65° + 40° + ∠QRS = 180°
105° + ∠QRS = 180°
∠QRS = 180° – 105°
∠QRS = 75°

इस पृष्ठ पर कई प्रश्न दिए गए हैं। नियम के अनुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों (1 घ, ङ, च) का सटीक SVG और विस्तृत हल नीचे प्रस्तुत है:

प्रश्न 1 (घ)

सरल रेखा x + y = 0 की लम्ब रेखा x-अक्ष के साथ कोण बनाती है:

विकल्प:
(i) 30°      (ii) 45°      (iii) 60°      (iv) 90°
उत्तर: (ii) 45°

हल:
दी गई रेखा का समीकरण: x + y = 0 ⇒ y = -x
इस रेखा की प्रवणता (Slope, m₁) = -1 है।

हम जानते हैं कि दो परस्पर लम्ब रेखाओं की प्रवणताओं का गुणनफल -1 होता है (m₁ × m₂ = -1):
(-1) × m₂ = -1
m₂ = 1

लम्ब रेखा द्वारा x-अक्ष के साथ बनाया गया कोण यदि θ हो, तो:
tan θ = m₂
tan θ = 1
tan θ = tan 45°
θ = 45°

प्रश्न 1 (ङ)

एक बेलन और शंकु की ऊँचाइयाँ बराबर हैं और आधार की त्रिज्याएँ बराबर हैं। उनके आयतनों का अनुपात होगा:

विकल्प:
(i) 1 : 3      (ii) 3 : 1      (iii) 2 : 3      (iv) 2 : 5
उत्तर: (ii) 3 : 1

हल:
माना बेलन और शंकु दोनों की समान त्रिज्या = r है और समान ऊँचाई = h है।

• बेलन का आयतन (Volume of Cylinder) = πr²h
• शंकु का आयतन (Volume of Cone) =
1 3
πr²h

दोनों के आयतनों का अनुपात ज्ञात करने पर:
अनुपात = πr²h (1/3)πr²h = 3 1 = 3 : 1

प्रश्न 1 (च)

रेखाओं x + y + 1 = 0 तथा x + y + 5 = 0 के बीच की दूरी होगी:

विकल्प:
(1) 4 इकाई      (2) 2√2 इकाई      (3) 4√2 इकाई      (4) 6√2 इकाई
उत्तर: (2) 2√2 इकाई

हल:
दो समान्तर रेखाओं ax + by + c₁ = 0 तथा ax + by + c₂ = 0 के बीच की दूरी का सूत्र है:
दूरी = |c₁ – c₂| √(a² + b²)
यहाँ दी गई रेखाओं के लिए: a = 1, b = 1, c₁ = 1, c₂ = 5
मान रखने पर:
दूरी = |1 – 5| √(1² + 1²) = 4 √2
हर का परिमेयीकरण (Rationalization) करने पर:
दूरी = (4 × √2) / (√2 × √2) = 4√2 / 2 = 2√2 इकाई

निर्देशानुसार, प्रश्न 2 के पहले 3 स्वतंत्र भागों (क, ख, ग) का पूर्ण एवं सटीक हल नीचे प्रस्तुत है:

प्रश्न 2 (क)

व्यंजकों x³ + x² + x + 1 और x⁴ – 1 का महत्तम समापवर्तक (HCF) ज्ञात कीजिए।

हल:
महत्तम समापवर्तक (HCF) ज्ञात करने के लिए दोनों व्यंजकों के गुणनखंड (Factors) करते हैं:

1. पहले व्यंजक का गुणनखंड:
x³ + x² + x + 1 = x²(x + 1) + 1(x + 1)
= (x + 1)(x² + 1)

2. दूसरे व्यंजक का गुणनखंड:
x⁴ – 1 = (x²)² – (1²)²
सूत्र a² – b² = (a – b)(a + b) का उपयोग करने पर:
= (x² – 1)(x² + 1)
पुनः x² – 1 को (x – 1)(x + 1) लिखने पर:
= (x – 1)(x + 1)(x² + 1)

3. महत्तम समापवर्तक (HCF) निकालना:
दोनों व्यंजकों में जो गुणनखंड उभयनिष्ठ (Common) हैं, उन्हें चुनते हैं:
• उभयनिष्ठ गुणनखंड = (x + 1) और (x² + 1)

HCF = (x + 1)(x² + 1)
गुणा करने पर:
HCF = x³ + x² + x + 1

उत्तर: महत्तम समापवर्तक (HCF) x³ + x² + x + 1 है।

प्रश्न 2 (ख)

सिद्ध कीजिए:
tan² A sec² B – sec² A tan² B = tan² A – tan² B

हल:
LHS (वाम पक्ष) लेने पर:
LHS = tan² A sec² B – sec² A tan² B

त्रिकोणमितीय सर्वसमिका sec² θ = 1 + tan² θ का उपयोग करके sec वाले पदों को tan में बदलने पर:
• sec² B = 1 + tan² B
• sec² A = 1 + tan² A

इन मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
LHS = tan² A (1 + tan² B) – (1 + tan² A) tan² B

कोष्ठक खोलने (गुणा करने) पर:
= (tan² A + tan² A tan² B) – (tan² B + tan² A tan² B)
= tan² A + tan² A tan² B – tan² B – tan² A tan² B

समान पद + tan² A tan² B और – tan² A tan² B आपस में निरस्त (कट) हो जाएँगे:
= tan² A – tan² B = RHS

इति सिद्धम्।

प्रश्न 2 (ग)

चित्र में, वृत्त का केन्द्र O है (चित्र में O को Q दर्शाया गया है)। यदि ∠AOB = 90° तथा ∠PBA = 30° हो, तो ∠PAO की माप ज्ञात कीजिए।

O A B P 90° 30°
हल:
1. त्रिभुज ▵OAB में:
चूँकि OA और OB वृत्त की त्रिज्याएँ हैं, इसलिए OA = OB होगा।
हम जानते हैं कि बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण समान होते हैं:
∠OAB = ∠OBA

त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है:
∠AOB + ∠OAB + ∠OBA = 180°
90° + 2∠OAB = 180°
2∠OAB = 90° ⇒ ∠OAB = 45° —— (समीकरण 1)

2. वृत्तखंड के कोण के नियम से:
केन्द्र पर बना कोण परिधि पर बने कोण का दुगुना होता है।
जीवा AB द्वारा केन्द्र पर बना कोण ∠AOB = 90° है, इसलिए परिधि पर बना कोण ∠APB इसका आधा होगा:
∠APB = 90° / 2 = 45° —— (समीकरण 2)

3. त्रिभुज ▵PAB में:
त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है:
∠APB + ∠PBA + ∠PAB = 180°
मान रखने पर (∠PBA = 30° दिया है):
45° + 30° + ∠PAB = 180°
75° + ∠PAB = 180° ⇒ ∠PAB = 105° —— (समीकरण 3)

4. ∠PAO का मान ज्ञात करना:
चित्र के अनुसार, कोण ∠PAB दो कोणों का योग है:
∠PAB = ∠PAO + ∠OAB
105° = ∠PAO + 45° (समीकरण 1 से मान रखने पर)
∠PAO = 105° – 45°
∠PAO = 60°

उत्तर: ∠PAO की माप 60° है।

दिए गए चित्र के सभी तीनों प्रश्नों [प्रश्न 2 (घ), प्रश्न 3 (क) और (ख)] का विस्तृत एवं सटीक हल नीचे प्रस्तुत है:

प्रश्न 2 (घ)

एक गोले के आयतन और वक्र पृष्ठ के संख्यात्मक मान बराबर हैं। गोले की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।

हल:
माना गोले की त्रिज्या = r इकाई है।

हम जानते हैं कि:
• गोले का आयतन (Volume of Sphere) =
4 3
πr³
• गोले का वक्र पृष्ठ (Surface Area of Sphere) = 4πr²

प्रश्न के अनुसार दोनों के संख्यात्मक मान बराबर हैं:
4 3 πr³ = 4πr²
दोनों पक्षों से 4 और π को काटने पर:
1 3 r³ = r²
दोनों पक्षों को r² से भाग देने पर (चूंकि त्रिज्या r ≠ 0):
1 3 r = 1
r = 3 इकाई

उत्तर: गोले की त्रिज्या 3 इकाई है।

प्रश्न 3 (क)

सिद्ध कीजिए कि समीकरण (q – r)x² + (r – p)x + (p – q) = 0 का एक मूल 1 है। समीकरण का दूसरा मूल भी ज्ञात कीजिए।

हल:
दी गई द्विघात समीकरण: (q – r)x² + (r – p)x + (p – q) = 0

1. सिद्ध करना कि 1 एक मूल है:
समीकरण के बाएं पक्ष (LHS) में x = 1 रखने पर:
LHS = (q – r)(1)² + (r – p)(1) + (p – q)
= q – r + r – p + p – q
सभी पद आपस में कट जाते हैं:
= 0 = RHS
चूँकि x = 1 समीकरण को संतुष्ट करता है, अतः 1 इस समीकरण का एक मूल है।

2. दूसरा मूल ज्ञात करना:
माना समीकरण का दूसरा मूल β है और पहला मूल α = 1 है।
मानक द्विघात समीकरण Ax² + Bx + C = 0 से तुलना करने पर:
A = (q – r), B = (r – p), C = (p – q)

हम जानते हैं कि मूलों का गुणनफल (α × β) = C / A होता है:
1 × β = (p – q) / (q – r)
β = p – q q – r

उत्तर: दूसरा मूल (p – q)/(q – r) है।

प्रश्न 3 (ख)

यदि n प्रेक्षणों x₁, x₂, x₃, ….., xₙ का समान्तर माध्य m है, तो प्रेक्षणों

x₁ k , x₂ k , x₃ k , ….., xₙ k
के समान्तर माध्य ज्ञात कीजिए जहाँ k ≠ 0.

हल:
दिया गया है कि मूल प्रेक्षणों का माध्य m है:
m = x₁ + x₂ + x₃ + … + xₙ n
इससे हमें प्राप्त होता है: x₁ + x₂ + x₃ + … + xₙ = n ⋅ m —— (समीकरण 1)

अब नए प्रेक्षणों का नया माध्य (M) ज्ञात करने पर:
M = (x₁/k) + (x₂/k) + (x₃/k) + … + (xₙ/k) n
अंश में से 1/k कॉमन (उभयनिष्ठ) लेने पर:
M =

सांख्यिकी (Statistics) का यह सिद्धांत पूरी तरह सही है। आपके द्वारा भेजे गए निष्कर्ष को और अधिक स्पष्ट और आकर्षक रूप देने के लिए नीचे अंतिम समीक्षा दी गई है:

समान्तर माध्य का महत्वपूर्ण गुणधर्म (Property of Mean)

नियम:
यदि n प्रेक्षणों का मूल समान्तर माध्य m है, और प्रत्येक प्रेक्षण में एक निश्चित गैर-शून्य संख्या k से भाग दिया जाता है, तो प्राप्त नए आंकड़ों का नया समान्तर माध्य भी मूल माध्य का 1/k गुना हो जाता है।

गणितीय रूप (SVG Representation):
यदि प्रत्येक प्रेक्षण xi → xi / k हो, तो:

नया माध्य (M) = m k

अंतिम उत्तर: नया समान्तर माध्य m/k है।

दिए गए चित्र के दोनों प्रश्नों [प्रश्न 3 (ग) और (घ)] का विस्तृत एवं सटीक हल नीचे प्रस्तुत है:

प्रश्न 3 (ग)

सिद्ध कीजिए:
16 sin 10° sin 30° sin 50° sin 70° = 1

हल:
LHS (वाम पक्ष) लेने पर:
LHS = 16 sin 10° sin 30° sin 50° sin 70°

हम जानते हैं कि sin 30° = 1/2 होता है। यह मान रखने पर:
LHS = 16 ×
1 2
× sin 10° sin 50° sin 70°
LHS = 8 sin 10° sin 50° sin 70°

पदों को सुव्यवस्थित करने पर:
LHS = 4 sin 10° ⋅ [2 sin 70° sin 50°]

त्रिकोणमितीय सूत्र 2 sin A sin B = \cos(A – B) – \cos(A + B) का उपयोग करने पर:
= 4 sin 10° ⋅ [cos(70° – 50°) – cos(70° + 50°)]
= 4 sin 10° ⋅ [cos 20° – cos 120°]

हम जानते हैं कि cos 120° = -1/2 होता है:
= 4 sin 10° ⋅ [cos 20° – (-1/2)]
= 4 sin 10° ⋅ [cos 20° + 1/2]
= 4 sin 10° cos 20° + 2 sin 10°
= 2 [2 cos 20° sin 10°] + 2 sin 10°

त्रिकोणमितीय सूत्र 2 cos A sin B = \sin(A + B) – \sin(A – B) का उपयोग करने पर:
= 2 [sin(20° + 10°) – sin(20° – 10°)] + 2 sin 10°
= 2 [sin 30° – sin 10°] + 2 sin 10°
= 2 sin 30° – 2 sin 10° + 2 sin 10°
= 2 sin 30°

पुनः sin 30° = 1/2 रखने पर:
= 2 × (1/2) = 1 = RHS

इति सिद्धम्।

प्रश्न 3 (घ)

चित्र में, O वृत्त का केन्द्र है और AT वृत्त की स्पर्श रेखा है। यदि ∠BAT = 60° तो x, y और z के मान ज्ञात कीजिए।

O T A B C 60°
हल:
1. x का मान ज्ञात करना (एकांतर खंड प्रमेय द्वारा):
एकांतर खंड प्रमेय (Alternate Segment Theorem) के अनुसार, वृत्त की किसी स्पर्श रेखा और स्पर्श बिन्दु से होकर जाने वाली जीवा के बीच बना कोण, उस जीवा द्वारा एकांतर वृत्तखंड में बने कोण के बराबर होता है।
∠BCA = ∠BAT
x° = 60°
x = 60

2. y का मान ज्ञात करना (केन्द्र पर बना कोण):
हम जानते हैं कि वृत्त के किसी चाप द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण, उसी चाप द्वारा परिधि के शेष भाग पर अंतरित कोण का दोगुना होता है।
∠AOB = 2 × ∠BCA
y° = 2 × x°
y° = 2 × 60° = 120°
y = 120

3. z का मान ज्ञात करना (स्पर्श रेखा पर त्रिज्या की लम्बवतता):
वृत्त के स्पर्श बिन्दु पर त्रिज्या, स्पर्श रेखा पर लम्ब होती है (OA ⊥ AT)।
∠OAT = 90°
चित्र से, ∠OAT = ∠OAB + ∠BAT
90° = z° + 60°
z° = 90° – 60° = 30°
z = 30

उत्तर: x = 60, y = 120, z = 30

इस नए पृष्ठ पर प्रश्न 4, 5 और 6 के विभिन्न भाग दिए गए हैं। नियमानुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों [प्रश्न 4 (क), (ख) और (ग)] का विस्तृत हल और सटीक SVG आरेख नीचे दिए गए हैं:

प्रश्न 4 (क)

एक व्यक्ति एक दुकान से ₹ 654 के मूल्य की कमीज खरीदता है। उसे 9% बिक्री कर अतिरिक्त देना है। वह दुकानदार से कमीज का मूल्य इतना कम करने के लिए अनुरोध करता है कि उसे बिक्रीकर सहित ₹ 654 देना पड़े। कमीज के मूल्य में आवश्यक कमी ज्ञात कीजिए।

हल:
• कमीज का वर्तमान अंकित मूल्य = ₹ 654
• बिक्री कर की दर = 9%

माना दुकानदार द्वारा घटाया गया कमीज का नया मूल्य = x रुपये है।
इस नए मूल्य पर 9% बिक्री कर लगाने के बाद कुल देय राशि ₹ 654 होनी चाहिए:
x + x का 9% = 654
x + 0.09x = 654
1.09x = 654

x का मान निकालने के लिए समीकरण इस प्रकार होगा:
x = 654 1.09 = 600

अतः कमीज का घटाया गया मूल्य ₹ 600 है।

कमीज के मूल्य में आवश्यक कमी:
आवश्यक कमी = मूल मूल्य – नया मूल्य
आवश्यक कमी = 654 – 600 = ₹ 54

उत्तर: कमीज के मूल्य में ₹ 54 की कमी आवश्यक है।

प्रश्न 4 (ख)

एक वृत्त की दो समान्तर जीवाएं AB = 8 सेमी और CD = 6 सेमी वृत्त के केन्द्र O के एक ही तरफ स्थित हैं। यदि वृत्त की त्रिज्या 5 सेमी है तो जीवाओं के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।

O A B C D M N
हल:
दिया है: त्रिज्या (R) = 5 सेमी, जीवा AB = 8 सेमी, जीवा CD = 6 सेमी।
माना केन्द्र O से जीवा AB पर लम्ब OM है तथा जीवा CD पर लम्ब ON है। केन्द्र से जीवा पर खींचा गया लम्ब उसे समद्विभाजित करता है:
• AM = 8 / 2 = 4 सेमी
• CN = 6 / 2 = 3 सेमी

1. समकोण त्रिभुज OMA में (पाइथागोरस प्रमेय द्वारा):
OM = √(OA² – AM²)
OM = √(5² – 4²) = √(25 – 16) = √9 = 3 सेमी

2. समकोण त्रिभुज ONC में (पाइथागोरस प्रमेय द्वारा):
ON = √(OC² – CN²)
ON = √(5² – 3²) = √(25 – 9) = √16 = 4 सेमी

3. जीवाओं के बीच की दूरी (MN):
चूँकि दोनों जीवाएँ केन्द्र के एक ही ओर स्थित हैं:
MN = ON – OM
MN = 4 – 3 = 1 सेमी

उत्तर: जीवाओं के बीच की दूरी 1 सेमी है।

प्रश्न 4 (ग)

बिन्दु (3, 5) से रेखा 3x + 4y + 2 = 0 पर खींचे गए लम्ब के पाद (Foot of Perpendicular) का निर्देशांक ज्ञात कीजिए।

हल:
बिन्दु (x₁, y₁) से रेखा ax + by + c = 0 पर लम्ब के पाद (h, k) का सूत्र है:
h – x₁ a = k – y₁ b = – ax₁ + by₁ + c a² + b²
यहाँ x₁ = 3, y₁ = 5, a = 3, b = 4, c = 2 हैं। मान प्रतिस्थापित करने पर:

दाहिने पक्ष का मान:
ax₁ + by₁ + c = 3(3) + 4(5) + 2 = 9 + 20 + 2 = 31
a² + b² = 3² + 4² = 9 + 16 = 25
अतः अनुपात = -31 / 25

h (x-निर्देशांक) के लिए:
(h – 3) / 3 = -31 / 25
h – 3 = -93 / 25 ⇒ h = 3 – 93/25 = (75 – 93) / 25 = -18 / 25

k (y-निर्देशांक) के लिए:
(k – 5) / 4 = -31 / 25
k – 5 = -124 / 25 ⇒ k = 5 – 124/25 = (125 – 124) / 25 = 1 / 25

उत्तर: लम्ब के पाद के निर्देशांक (-18/25, 1/25) हैं।

प्रश्न 4 (घ)

एक आयताकार कागज की लम्बाई और चौड़ाई क्रमशः 22 सेमी और 12 सेमी है। कागज को इसके लम्बाई और चौड़ाई के अनुदिश मोड़कर दो लम्ब वृत्तीय बेलन बनाये जाते हैं। बेलनों के आयतनों का अन्तर ज्ञात कीजिए।

हल:
कागज की विमाएँ: लम्बाई (L) = 22 सेमी, चौड़ाई (W) = 12 सेमी

स्थिति 1: लम्बाई के अनुदिश मोड़ने पर (बेलन 1):
यहाँ, बेलन के आधार का परिधि = लम्बाई (22 सेमी) और ऊँचाई (h₁) = चौड़ाई (12 सेमी)
2πr₁ = 22 ⇒ 2 × (22/7) × r₁ = 22 ⇒ r₁ = 7/2 सेमी
बेलन 1 का आयतन (V₁) = πr₁²h₁ = (22/7) × (7/2) × (7/2) × 12 = 462 सेमी³

स्थिति 2: चौड़ाई के अनुदिश मोड़ने पर (बेलन 2):
यहाँ, बेलन के आधार का परिधि = चौड़ाई (12 सेमी) और ऊँचाई (h₂) = लम्बाई (22 सेमी)
2πr₂ = 12 ⇒ 2 × (22/7) × r₂ = 12 ⇒ r₂ = 21/11 सेमी
बेलन 2 का आयतन (V₂) = πr₂²h₂ = (22/7) × (21/11) × (21/11) × 22 = 5544 / 11 = 252 सेमी³

दोनों बेलनों के आयतनों का अन्तर:
अन्तर = V₁ – V₂ = 462 – 252 = 210 सेमी³

उत्तर: बेलनों के आयतनों का अन्तर 210 सेमी³ है।

प्रश्न 5 (क)

हल कीजिए:
5^(x+1) + 5^(2-x) = 5³ + 1

हल:
दिए गए समीकरण को घातांक नियमों से विस्तारित करने पर:
5 × 5^x + 5² / 5^x = 125 + 1
5 × 5^x + 25 / 5^x = 126

माना 5^x = y, तब समीकरण निम्न रूप में परिवर्तित होगा:
5y + 25/y = 126
y से गुणा करने पर: 5y² + 25 = 126y
व्यवस्थित करने पर: 5y² – 126y + 25 = 0

मध्य पद को विभाजित करने पर (-125y और -y):
5y² – 125y – y + 25 = 0
5y(y – 25) – 1(y – 25) = 0
(5y – 1)(y – 25) = 0

यहाँ से y के दो मान प्राप्त होते हैं:
1. y = 25 ⇒ 5^x = 5² ⇒ x = 2
2. 5y = 1 ⇒ y = 1/5 ⇒ 5^x = 5^(-1) ⇒ x = -1

उत्तर: x = 2 या x = -1

प्रश्न 5 (ख)

सिद्ध कीजिए:

tan(45° – A/2) = cos A 1 + sin A

हल:
LHS (वाम पक्ष) लेने पर:
LHS = tan(45° – A/2)
सूत्र tan(X – Y) = (tan X – tan Y) / (1 + tan X tan Y) का उपयोग करने पर (tan 45° = 1):
LHS = (1 – tan(A/2)) / (1 + tan(A/2))

tan(A/2) को sin(A/2) / cos(A/2) में बदलने पर:
LHS = [cos(A/2) – sin(A/2)] / [cos(A/2) + sin(A/2)]

अंश और हर दोनों को [cos(A/2) + sin(A/2)] से गुणा करने पर:
= [cos²(A/2) – sin²(A/2)] / [cos(A/2) + sin(A/2)]²
= [cos²(A/2) – sin²(A/2)] / [cos²(A/2) + sin²(A/2) + 2 sin(A/2) cos(A/2)]

त्रिकोणमितीय अर्ध-कोण सूत्रों का उपयोग करने पर:
• cos²(A/2) – sin²(A/2) = cos A
• cos²(A/2) + sin²(A/2) = 1
• 2 sin(A/2) cos(A/2) = sin A

मान प्रतिस्थापित करने पर:
= cos A / (1 + sin A) = RHS

इति सिद्धम्।

प्रश्न 5 (ग)

सिद्ध कीजिए कि किसी चक्रीय चतुर्भुज के अन्तः कोणों के अर्द्धकों द्वारा बना हुआ चतुर्भुज भी चक्रीय होता है।

A B C D P Q R S
उपपत्ति (Proof):
माना ABCD एक चक्रीय चतुर्भुज है। इसके कोणों A, B, C, D के अर्द्धक मिलकर एक आंतरिक चतुर्भुज PQRS बनाते हैं।

1. त्रिभुज ▵APB में, त्रिभुज के तीनों अंतः कोणों का योग 180° होता है:
∠APB + ∠PAB + ∠PBA = 180°
चूँकि AP और BP क्रमशः कोण A और B के अर्द्धक हैं:
∠APB + 1/2 ∠A + 1/2 ∠B = 180°
∠APB = 180° – 1/2 (∠A + ∠B) —— (समीकरण 1)

2. इसी प्रकार, त्रिभुज ▵CRD में कोणों के अर्द्धकों से:
∠CRD + ∠RCD + ∠RDC = 180°
∠CRD + 1/2 ∠C + 1/2 ∠D = 180°
∠CRD = 180° – 1/2 (∠C + ∠D) —— (समीकरण 2)

3. शीर्षभिमुख कोण (Vertically opposite angles) के नियम से, चतुर्भुज PQRS के आंतरिक सम्मुख कोणों के लिए:
• ∠SPQ = ∠APB
• ∠SRQ = ∠CRD

4. अब इन दोनों सम्मुख कोणों का योग ज्ञात करने पर (समीकरण 1 और 2 को जोड़ने पर):
∠SPQ + ∠SRQ = 180° – 1/2 (∠A + ∠B) + 180° – 1/2 (∠C + ∠D)
∠SPQ + ∠SRQ = 360° – 1/2 (∠A + ∠B + ∠C + ∠D)

5. हम जानते हैं कि किसी भी चतुर्भुज के चारों अंतः कोणों का योग 360° होता है (∠A + ∠B + ∠C + ∠D = 360°):
∠SPQ + ∠SRQ = 360° – 1/2 (360°)
∠SPQ + ∠SRQ = 360° – 180° = 180°

चूँकि चतुर्भुज PQRS के सम्मुख कोणों का योग 180° है, अतः PQRS भी एक चक्रीय चतुर्भुज है।

इति सिद्धम्।

प्रश्न 5 (घ)

14 सेमी त्रिज्या वाले धातु के एक गोले को पिघलाकर 3.5 सेमी आधार की त्रिज्या और 8 सेमी ऊँचाई वाले छोटे लम्ब वृत्तीय शंकु बनाये गये हैं। इस प्रकार बने शंकुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।

हल:
गोले के लिए: त्रिज्या (R) = 14 सेमी
शंकु के लिए: त्रिज्या (r) = 3.5 सेमी = 7/2 सेमी, ऊँचाई (h) = 8 सेमी

माना कुल बने शंकुओं की संख्या = n है।
पिघलाने पर कुल आयतन समान रहता है:
गोले का आयतन = n × एक शंकु का आयतन

4 3 πR³ = n × 1 3 πr²h
दोनों पक्षों से π और हर में से 3 को निरस्त (काटने) करने पर:
4R³ = n × r²h

सभी मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
4 × 14 × 14 × 14 = n × (7/2) × (7/2) × 8
4 × 14 × 14 × 14 = n × (49 / 4) × 8
4 × 14 × 14 × 14 = n × 49 × 2
4 × 14 × 14 × 14 = n × 98

n का मान निकालने पर:
n = 4 × 14 × 14 × 14 98
n = (4 × 2744) / 98
n = 10976 / 98 = 112

उत्तर: इस प्रकार बने शंकुओं की कुल संख्या 112 है।

प्रश्न 6 (क)

एक हवाई जहाज अपने निर्धारित समय से 30 मिनट बाद चलता है तथा 1500 किमी दूरी पर स्थित अपने गन्तव्य स्थान पर पहुँचने के लिए वह अपनी चाल में 250 किमी प्रति घण्टा वृद्धि कर देता है। विमान की मूल चाल ज्ञात कीजिए।

हल:
माना हवाई जहाज की मूल चाल = v किमी/घण्टा है।
कुल दूरी = 1500 किमी
समय में अंतर = 30 मिनट = 30/60 घण्टा = 1/2 घण्टा

सूत्र समय = दूरी / चाल के अनुसार समीकरण बनाने पर:
1500

द्विघात समीकरण हल की समीक्षा (Review of Quadratic Equation)

मुख्य निष्कर्ष:
हवाई जहाज की मूल चाल ज्ञात करने के लिए बनाया गया द्विघात समीकरण v² + 250v – 750000 = 0 गुणनखंड विधि से पूरी तरह सही हल किया गया है।

गुणनखंडन का सटीक विवरण (Mathematical Proof):
मध्य पद को +1000v और -750v में विभाजित करने पर दोनों का गुणनफल -750000v² आता है, जो कि पहले और अंतिम पद के गुणनफल के बिल्कुल बराबर है।

अंतिम मान (SVG Representation):
मूल चाल (v) = 750 किमी/घण्टा

चूँकि चाल कभी ऋणात्मक नहीं हो सकती, इसलिए v = -1000 को अग्राह्य (अमान्य) माना गया है।

उत्तर: हवाई जहाज की मूल चाल 750 किमी/घण्टा थी।

इस नए पृष्ठ पर वरिष्ठ नागरिक आयकर, सांख्यिकी (माध्यिका व बहुलक) और ज्यामिति से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न दिए गए हैं। नियमानुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों [प्रश्न 6(ख), 6(ग)(1) और 6(ग)(2)] का विस्तृत हल और सटीक SVG आरेख नीचे दिए गए हैं:

प्रश्न 6 (ख) [वरिष्ठ नागरिक आयकर गणना]

वित्तीय वर्ष 2016-17 में एक वरिष्ठ नागरिक की मासिक आय ₹ 1,10,000 थी। उसने सामान्य भविष्य निधि में ₹ 10,000 प्रति माह और जीवन बीमा निगम में ₹ 12,000 अर्धवार्षिक प्रीमियम जमा किया था। उसने ₹ 10,000 का राष्ट्रीय बचत पत्र खरीदा था। प्रधानमंत्री राहत कोष में भी उसने ₹ 20,000 दान दिया जिस पर 80G के अंतर्गत 100% छूट प्राप्त करता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के अन्तिम माह में दिये जाने वाले आयकर की गणना कीजिए, यदि वह ₹ 10,000 प्रति माह वित्तीय वर्ष के प्रथम 11 माह के लिये आयकर देता रहा हो।

हल:
1. कुल वार्षिक आय की गणना:
• मासिक आय = ₹ 1,10,000
• कुल वार्षिक आय = 1,10,000 × 12 = ₹ 13,20,000

2. धारा 80C के अंतर्गत कुल बचत की गणना:
• सामान्य भविष्य निधि (GPF) = 10,000 × 12 = ₹ 1,20,000
• जीवन बीमा निगम (LIC) = 12,000 × 2 = ₹ 24,000 (अर्धवार्षिक)
• राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) = ₹ 10,000
• कुल वास्तविक बचत = 1,20,000 + 24,000 + 10,000 = ₹ 1,54,000
चूँकि धारा 80C के तहत अधिकतम छूट सीमा ₹ 1,50,000 है, इसलिए केवल ₹ 1,50,000 की छूट मान्य होगी।

3. धारा 80G के अंतर्गत दान पर छूट:
• प्रधानमंत्री राहत कोष में दान (100% छूट) = ₹ 20,000

4. कर योग्य आय (Taxable Income) की गणना:
• कर योग्य आय = कुल वार्षिक आय – (80C बचत छूट + 80G दान छूट)
• कर योग्य आय = 13,20,000 – (1,50,000 + 20,000) = 13,20,000 – 1,70,000 = ₹ 11,50,000

5. आयकर स्लैब (वरिष्ठ नागरिक के लिए सारणी अनुसार) के अनुसार गणना:
वरिष्ठ नागरिक के लिए कर योग्य आय ₹ 11,50,000 है, जो कि ₹ 10,00,000 से अधिक है (स्लैब 4):
• ₹ 10,00,000 तक मूल आयकर = ₹ 1,20,000
• ₹ 10,00,000 से अधिक की राशि = 11,50,000 – 10,00,000 = ₹ 1,50,000
• इस अतिरिक्त राशि पर 30% कर = 1,50,000 × (30/100) = ₹ 45,000
• कुल मूल आयकर = 1,20,000 + 45,000 = ₹ 1,65,000

6. शिक्षा उपकर (Cess) और कुल वार्षिक कर:
• शिक्षा उपकर = देय आयकर का 3% = 1,65,000 × (3/100) = ₹ 4,950
• कुल वार्षिक देय आयकर = 1,65,000 + 4,950 = ₹ 1,69,950

7. अन्तिम माह में देय आयकर की गणना:
• प्रथम 11 महीनों में चुकाया गया कुल अग्रिम टैक्स = 10,000 × 11 = ₹ 1,10,000
• अंतिम (12वें) माह में देय शेष आयकर = कुल वार्षिक आयकर – चुकाया गया टैक्स
• अंतिम माह का टैक्स = 1,69,950 – 1,10,000 = ₹ 59,950

उत्तर: अंतिम माह में देय आयकर ₹ 59,950 है।

प्रश्न 6 (ग) (1)

संख्याएं 6, 8, 11, 12, (2x – 8), (2x + 10), 35, 42, 50 आरोही क्रम में लिखे गये हैं। यदि उनकी माध्यिका 25 हो तो x का मान कीजिए।
*(नोट: मूल हस्तलिखित पेपर के आधार पर यह पद 2x-8 और 2x+10 है)*

हल:
दिए गए आंकड़ों में कुल पदों की संख्या (n) = 9 है, जो कि एक विषम संख्या (Odd Number) है।

जब पदों की संख्या विषम होती है, तो माध्यिका (Median) का सूत्र निम्न होता है:
माध्यिका = n + 1 2 वें पद का मान
यहाँ n = 9 रखने पर:
• माध्यिका = (9 + 1)/2 = 5वें पद का मान

दिए गए आरोही क्रम में 5वाँ पद (2x – 8) है।
प्रश्न के अनुसार माध्यिका = 25 दी गई है:
2x – 8 = 25
2x = 25 + 8
2x = 33
x = 33 2 = 16.5

उत्तर: x का मान 16.5 है।

प्रश्न 6 (ग) (2)

निम्नलिखित आंकड़ों से बहुलक (Mode) ज्ञात कीजिए:

पद (x) 3 4 5 6 7 8
बारम्बारता (f) 1 3 7 5 2 2
हल:
वर्गीकृत या अवर्गीकृत बारम्बारता बंटन में, बहुलक (Mode) वह पद मान होता है जिसकी बारम्बारता (आवृत्ति) सबसे अधिक होती है।

दिए गए आंकड़ों का निरीक्षण करने पर हम पाते हैं कि:
• अधिकतम बारम्बारता = 7 है।
• यह अधिकतम बारम्बारता पद मान 5 से संबंधित है।

अतः इस सारणी का बहुलक 5 होगा।

उत्तर: आंकड़ों का बहुलक 5 है।

प्रश्न 6 (घ)

रेखाओं

x a + y b = 1 और x b y a = 1
के प्रतिच्छेद बिन्दु तथा मूल बिन्दु से होकर जाने वाली रेखा का समीकरण ज्ञात कीजिए।

हल:
हम जानते हैं कि दो रेखाओं P₁ = 0 और P₂ = 0 के प्रतिच्छेद बिन्दु से होकर जाने वाली किसी भी रेखा का कुल समीकरण इस रूप में लिखा जा सकता है:
(P₁) + λ(P₂) = 0

अतः दी गई रेखाओं के प्रतिच्छेद बिन्दु से जाने वाली रेखा का समीकरण:
(x/a + y/b – 1) + λ(x/b – y/a – 1) = 0 —— (समीकरण 1)
चूँकि यह रेखा मूल बिन्दु (0, 0) से होकर जाती है, इसलिए x = 0 और y = 0 समीकरण 1 को संतुष्ट करेंगे:
(0/a + 0/b – 1) + λ(0/b – 0/a – 1) = 0
-1 + λ(-1) = 0
-λ = 1 ⇒ λ = -1

λ = -1 का यह मान समीकरण 1 में वापस रखने पर अभीष्ट रेखा का समीकरण प्राप्त होगा:
(x/a + y/b – 1) – 1 × (x/b – y/a – 1) = 0
x/a + y/b – 1 – x/b + y/a + 1 = 0
x/a – x/b + y/b + y/a = 0

पदों को व्यवस्थित करने पर:
x(1/a – 1/b) + y(1/a + 1/b) = 0
x b – a ab + y b + a ab = 0
दोनों पक्षों को ab से गुणा करने पर:
(b – a)x + (b + a)y = 0 या (a – b)x – (a + b)y = 0

उत्तर: अभीष्ट रेखा का समीकरण (b – a)x + (b + a)y = 0 है।

प्रश्न 7 (क)

8 मीटर ऊँचे एक मन्दिर के शीर्ष भाग पर एक पताका-दण्ड लगा है। मन्दिर के आधार से 16 मीटर दूर स्थित एक बिन्दु पर पताका-दण्ड द्वारा आन्तरिक कोण की स्पर्शा (tangent) 1/8 है। पताका-दण्ड की लम्बाई दशमलव के द्वितीय स्थान तक शुद्ध ज्ञात कीजिए।

P (बिन्दु) B (आधार) T (मन्दिर शीर्ष) F (पताका शीर्ष) 8 मी h 16 मी α θ
हल:
माना मन्दिर की ऊँचाई BT = 8 मी है, और इसके ऊपर लगा पताका-दण्ड TF = h मी है।
भूमि पर स्थित बिन्दु P है, जहाँ से मन्दिर के आधार की दूरी PB = 16 मी है।
माना मन्दिर के शीर्ष का उन्नयन कोण ∠TPB = α है, तथा पताका-दण्ड द्वारा अंतरित कोण ∠FPT = θ है। दिया गया है कि tan θ = 1/8 है।

1. समकोण त्रिभुज ▵TPB में:
tan α = लम्ब / आधार = BT / PB
tan α = 8 / 16 = 1/2 —— (समीकरण 1)

2. समकोण त्रिभुज ▵FPB में (कुल कोण = α + θ):
tan(α + θ) = कुल ऊँचाई / आधार = (BT + TF) / PB
tan(α + θ) = (8 + h) / 16

त्रिकोणमितीय सूत्र tan(A + B) = (tan A + tan B) / (1 – tan A tan B) का उपयोग करने पर:
tan α + tan θ 1 – tan α tan θ = (8 + h) / 16
tan α = 1/2 और tan θ = 1/8 के मान प्रतिस्थापित करने पर:
अंश = 1/2 + 1/8 = 5/8
हर = 1 – (1/2 × 1/8) = 1 – 1/16 = 15/16

बाईं ओर का सरलीकरण करने पर:
(5/8) / (15/16) = (5/8) × (16/15) = 2/3

अब समीकरण इस प्रकार होगा:
2/3 = (8 + h) / 16
वज्रगुणा (Cross Multiplication) करने पर:
2 × 16 = 3(8 + h)
32 = 24 + 3h
3h = 32 – 24 = 8
h = 8 / 3 = 2.67 मीटर

उत्तर: पताका-दण्ड की लम्बाई 2.67 मीटर है।

क्षमा कीजियेगा, पृष्ठ के अंत में दिया गया त्रिकोणमितीय सिद्ध करने वाला अथवा (OR) का भाग (1) रह गया था। इसका पूर्ण हल नीचे दिया गया है:

प्रश्न 7 (क) अथवा (1)

यदि A + B + C = 90° हो, तो सिद्ध कीजिए कि:
tan A tan B + tan B tan C + tan C tan A = 1

हल:
दिया गया संबंध है:
A + B + C = 90°

C को दाईं ओर ले जाने पर:
A + B = 90° – C

दोनों पक्षों का tan (स्पर्शज्या) लेने पर:
tan(A + B) = tan(90° – C) —— (समीकरण 1)

त्रिकोणमितीय सूत्रों के अनुसार हम जानते हैं कि:
tan(A + B) = tan A + tan B 1 – tan A tan B

tan(90° – C) = cot C =
1 tan C
(पूरक कोण के नियम से)

इन दोनों मानों को समीकरण 1 में प्रतिस्थापित करने पर:
tan A + tan B 1 – tan A tan B = 1 tan C
अब वज्रगुणा (Cross Multiplication) करने पर:
tan C ⋅ (tan A + tan B) = 1 ⋅ (1 – tan A tan B)

कोष्ठक खोलने पर गुणा करने पर:
tan A tan C + tan B tan C = 1 – tan A tan B

दाईं ओर के ऋणात्मक पद – tan A tan B को बाईं ओर स्थानांतरित करने पर:
tan A tan B + tan B tan C + tan C tan A = 1

इति सिद्धम् (हेंस प्रूव्ड)।

इस नए पृष्ठ पर प्रश्न 7 के अंतर्गत त्रिकोणमितीय पहचान और ज्यामितीय रचना के प्रश्न दिए गए हैं। नियमानुसार, पहले 3 स्वतंत्र प्रश्नों का पूर्ण एवं सटीक हल नीचे प्रस्तुत है:

प्रश्न (2)

यदि A + B + C = 180° तो सिद्ध कीजिए:
cos A + cos B + cos C = 1 + 4 sin(A/2) sin(B/2) sin(C/2)

हल:
LHS (वाम पक्ष) लेने पर:
LHS = cos A + cos B + cos C

पहले दो पदों में सूत्र cos X + cos Y = 2 cos((X+Y)/2) cos((X-Y)/2) का उपयोग करने पर:
LHS = 2 cos((A + B)/2) cos((A – B)/2) + cos C —— (समीकरण 1)

चूँकि A + B + C = 180°, इसलिए:
(A + B)/2 = 90° – C/2
cos((A + B)/2) = cos(90° – C/2) = sin(C/2)

तथा अर्धकोण सूत्र से: cos C = 1 – 2 sin²(C/2)

इन मानों को समीकरण 1 में रखने पर:
LHS = 2 sin(C/2) cos((A – B)/2) + [1 – 2 sin²(C/2)]
LHS = 1 + 2 sin(C/2) [cos((A – B)/2) – sin(C/2)] —— (समीकरण 2)

पुनः sin(C/2) = cos((A + B)/2) प्रतिस्थापित करने पर:
LHS = 1 + 2 sin(C/2) [cos((A – B)/2) – cos((A + B)/2)]

त्रिकोणमितीय सूत्र cos(X – Y) – cos(X + Y) = 2 sin X sin Y का उपयोग करने पर:
[cos((A – B)/2) – cos((A + B)/2)] = 2 sin(A/2) sin(B/2)

LHS में मान रखने पर:
LHS = 1 + 2 sin(C/2) ⋅ [2 sin(A/2) sin(B/2)]
LHS = 1 + 4 sin(A/2) sin(B/2) sin(C/2) = RHS

इति सिद्धम्।

प्रश्न (ख)

5 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचिए। इसके केन्द्र से 13 सेमी दूर एक बिन्दु से दो स्पर्शियों (स्पर्श रेखाओं) की रचना कीजिए। इनकी लम्बाई नापकर लिखिए। क्या वे समान हैं? जवाब के समर्थन में कारण लिखिए। सम्पूर्ण रचना पद भी लिखिए।

O P T₁ T₂ 13 सेमी 12 सेमी
हल एवं रचना के चरण:
1. बिन्दु O को केन्द्र मानकर 5 सेमी त्रिज्या का एक वृत्त खींचा।
2. केन्द्र O से 13 सेमी की दूरी पर एक बिन्दु P लिया तथा OP को मिलाया।
3. OP का लम्ब समद्विभाजक खींचकर इसका मध्य-बिन्दु M प्राप्त किया।
4. M को केन्द्र और OM को त्रिज्या मानकर एक अन्य वृत्त खींचा, जो मूल वृत्त को बिन्दुओं T₁ और T₂ पर काटता है।
5. P से T₁ और T₂ को मिलाया। इस प्रकार PT₁ और PT₂ अभीष्ट स्पर्श रेखाएँ बनीं।

मापन एवं सत्यापन:
• नापने पर दोनों स्पर्श रेखाओं की लम्बाई 12 सेमी प्राप्त होती है।
हाँ, दोनों स्पर्श रेखाएँ समान हैं।

समर्थन में कारण (ज्यामितीय उपपत्ति):
समकोण त्रिभुज ▵OT₁P में पाइथागोरस प्रमेय से:
PT₁ = √(OP² – OT₁²) = √(13² – 5²) = √(169 – 25) = √144 = 12 सेमी
चूँकि बाहरी बिन्दु से वृत्त पर खींची गई दोनों स्पर्श रेखाएँ समान त्रिभुज नियम (RHS सर्वांगसमता) का पालन करती हैं, अतः दोनों की लम्बाई हमेशा समान (PT₁ = PT₂) होती है।

अथवा: त्रिभुज और अन्तःवृत्त की रचना

▵ABC की रचना कीजिए जिसमें AB = 6 सेमी, ∠A = 50° तथा ∠B = 60°। त्रिभुज के अन्तःवृत्त (Incircle) की रचना कीजिए तथा त्रिज्या नापकर लिखिए। सम्पूर्ण रचना विधि भी लिखिए।

रचना की विधि (Method of Construction):
1. सर्वप्रथम पटरी (Scale) की सहायता से एक रेखाखण्ड AB = 6 सेमी खींचा।
2. बिन्दु A पर चांदे (Protractor) की सहायता से 50° का कोण और बिन्दु B पर 60° का कोण बनाया। ये दोनों किरणें जहाँ मिलती हैं, उस बिन्दु को C नाम दिया। इस प्रकार ▵ABC प्राप्त हुआ।
3. कोणों ∠A और ∠B के अर्द्धक (Angle Bisectors) खींचे जो एक-दूसरे को बिन्दु I पर काटते हैं। यह बिन्दु I त्रिभुज का अन्तःकेन्द्र (Incenter) है।
4. बिन्दु I से भुजा AB पर एक लम्ब ID खींचा।
5. I को केन्द्र तथा ID को त्रिज्या मानकर एक वृत्त खींचा, जो त्रिभुज की तीनों भुजाओं को आंतरिक रूप से स्पर्श करता है। यही अभीष्ट अन्तःवृत्त है।

त्रिज्या का मापन:
• निर्मित चित्र में अन्तःवृत्त की त्रिज्या (ID) नापने पर लगभग 1.6 सेमी प्राप्त होती है।

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